जेन्डर क्या है ? जेन्डर एवं सेक्स की संकल्पना को इनके बीच अंतर से स्पष्ट करें । Gender Notes

 

´    जेन्डर क्या है ? जेन्डर एवं सेक्स की संकल्पना को इनके बीच अंतर से स्पष्ट करें ।

            What is gender? Explain the difference between the concepts of gender and sex

 

जेंडर की संकल्पना सन् 1970 के दशक के आरंभ में सामान्य बोलचाल भाषा में हमारे सामने आई।

नारीवादी विद्वान एन्न ऑकले ने अपनी पुस्तक Sex, Gender and Society (1972) में जेंडर निर्माण के विस्तार के लिए आधारशिला रखी थी। इस पुस्तक मे वह  कहती हैं कि “जेंडर संस्कृति का मामला है, जो कि पुरुष और महिला के सामाजिक वर्गीकरण को पुरुषत्व और नारीत्व के रूप में संदर्भित करता है।

 

 

जेंडर शब्द को समाजशास्त्रीय रूप से एक संकल्पना के रूप में प्रयोग किया जाता है। जेंडर शब्द का प्रयोग पुरुष और महिलाओं की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान को परिभाषित करने के लिए  किया जाता है। समाज इनको पुरुषों और महिलाओं के नाम से अलग करता है और इसी आधार पर इनको सामाजिक भूमिका निभाने का कार्य प्रदान करता है। इसका प्रयोग महिलाओं और पुरुषों की सामाजिक वास्तविकताओं को समझने के लिए किया जाता है।

 

लिंग और जेंडर के बीच अंतर उस सामान्य प्रवृत्ति को समाप्त करने के लिए प्रस्तुत किया गया जो महिलाओं की अधीनता को उनके शारीरिक बनावट (रचनातंत्र) से जोड़ता है। यह युगों से विश्वास किया जाता रहा है कि स्त्री की  विशेषताएँ, भूमिका, सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक स्तर का निर्धारण जैविक आधार (शारीरिक रचना ) पर किया जाता है जो कि एक प्राकृतिक सत्य है इसलिए इसमें परिवर्तन नहीं हो सकता है।

जबकि जेंडर की भूमिकाओं को सामाजीकरण की प्रक्रियाओं के माध्यम से निर्मित किया जाता है; यह निश्चित नहीं बल्कि परिवर्तनशील हैं। जेंडर व्यवस्थाओं को शिक्षा व्यवस्था, राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था, कानून तथा संस्कृति और परम्पराओं के माध्यम से संस्थापित किया जाता है।

जेन्डर  समाज के प्रत्येक पक्ष में गहराई से जुड़ा है, जैसे कि हमारी संस्थाओं में, सार्वजनिक स्थानों, कलाओं में, वस्त्रों में और गतिविधियों में जेंडर सरकारी कार्यालयों से लेकर गलियों के खेलों तक से जुड़ा हुआ होता है। यह परिवार, आसपड़ोस, चर्च, विद्यालय, मीडिया, गली में आना-जाना, रेस्तराओं में भोजन करना, आराम कक्षों में जाना इत्यादि सभी में समाहित होता है। और ये सभी स्थापनाएँ तथा स्थितियाँ एक-दूसरे से एक संगठित प्रकार से जुड़ी हैं। जेंडर हमारी संस्थाओं, हमारे कार्यों, हमारे विश्वास और हमारी आकांक्षाओं में इतनी व्यापकता से गुंथा हुआ है कि यह हमें पूरी तरह से प्राकृतिक दिखाई देता हैं जबकि ये वास्तविकता नहीं है ।

 

 

लोग सामान्यतः जैविक साक्ष्यों के आधार पर निर्धारित करते हैं कि कौन पुरुष या महिला है। इसके साथ यह भी है कि वे इसी ही प्रकार से पुरुषत्व या नारीत्व का निर्धारण नहीं कर सकते हैं, क्योंकि इसका पता लगाने के लिए आधार संस्कृति और समय तथा स्थान का विभेद हो सकता है।

जेंडर की उत्पत्ति जैविक नहीं होती है और लिंग तथा जेंडर के बीच सम्बन्ध प्राकृतिक भी नहीं होता है।

´  लिंग (सेक्स), बुनियादी स्तर पर, महिलाओं और पुरुषों के बीच का जीव-वैज्ञानिक अन्तर है। मनुष्य या तो एक पुरुष के रूप में पैदा होता है, या एक स्त्री के रूप में हालाँकि बच्चों की एक बहुत छोटी संख्या ऐसी भी है, जिनमें पुरुष और स्त्री की मिश्रित शरीर रचना पायी जाती है जिसे ट्रांसजेन्डर शब्द से परिभाषित किया जाता है । स्त्री और पुरुष के जीव-वैज्ञानिक अन्तर क्रोमोसोमों (पुरुष क्रोमोसोम XY तथा स्त्री क्रोमोसोम XX होते हैं), जननांगों, हार्मोनों और अन्य शारीरिक लक्षणों में प्रतिबिम्बित होते हैं।

´  सेक्स के विपरीत, जेंडर की निर्मिति सामाजिक रूप से होती है। जब एक शिशु जन्म लेता है तो किस प्रकार यह सामाजिक निर्मिति घटित होती है। परिवार, समाज और अन्य सामाजिक-आर्थिक प्रथाओं जैसी सामाजिक संरचनाएँ शिशु के सेक्स के आधार पर विभेदों को निर्धारित करती हैं। इन विभेदों में कपड़े पहनाना, व्यवहार, सामाजिक भूमिका, स्थिति, पहचान और जिम्मेदारी शामिल होते हैं। इस प्रकार जेंडर की निर्मिति की जाती है और उसका व्यवहार किया जाता है। 

 

              सेक्स

 

            जेन्डर

सेक्स जैविक ओर शारीरिक है

1.

जेन्डर सामाजिक सांस्कृतिक निर्मिती  है

सेक्स का संबंध पुरुष व स्त्री से जुड़े प्रजनन कार्यों से है

2.

जेन्डर का संबंध पुरुष एवं स्त्री के गुणों,व्यवहार के तरीकों , भूमिकाओं जिम्मेदारियों से है

सेक्स प्राकृतिक है अर्थात इसका निर्धारण प्रकृति के द्वारा होता है

3.

जेन्डर मानवीकृत है अर्थात इसका निर्धारण मनुष्य द्वारा होता है

सेक्स स्थायी होता है यह सभी स्थानों पर सभी समय प्रत्येक संस्कृति में सदैव एक जैसा होता है

4.

जेन्डर परिवर्तनशील है यह स्थान समय संस्कृति यहाँ तक कि एक परिवार से दूसरे परिवार में परिवर्तित हो सकता है

सेक्स सार्वभौमिक होता है

5.

जेन्डर स्थानीय होता है

 

  सीमोन द बोआ (Simone de Beauvoir) ने इस अन्तर को अपनी पुस्तक The Second Sex में दो दशक पूर्व उजागर किया था जब उन्होंने कहा था कि “औरत  पैदा नहीं होती, अपितु बनाई जाती  है।”

 

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 Notes by- Varsha Ma'am


 

 

 


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