स्वतंत्रता के पूर्व महिला आंदोलन. महिला सशक्तिकरण का आधार.

 

1. परिचय

  • भारत में महिला आंदोलन की शुरुआत 19वीं शताब्दी में हुई।
  • इसका मुख्य उद्देश्य था महिलाओं को सामाजिक अन्याय और कुरीतियों से मुक्त करना।
  • उस समय समाज पुरुष-प्रधान (पितृसत्तात्मक) था और महिलाओं को बहुत कम अधिकार प्राप्त थे।
  • प्रारम्भिक महिला आंदोलन में पुरुष समाज सुधारकों और बाद में महिलाओं दोनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

2. स्वतंत्रता से पहले महिला आंदोलन के कारण

महिलाओं के साथ कई सामाजिक कुरीतियाँ प्रचलित थीं, जैसे –

  • सती प्रथा
  • बाल विवाह
  • पर्दा प्रथा
  • विधवाओं की दयनीय स्थिति
  • शिक्षा का अभाव
  • संपत्ति और राजनीतिक अधिकारों की कमी

इन समस्याओं के विरोध में महिला आंदोलन शुरू हुआ।


3. पुरुषों द्वारा संचालित महिला अधिकार संगठन

प्रारम्भिक महिला आंदोलन में पुरुष समाज सुधारकों की बड़ी भूमिका थी।

प्रमुख सुधारक और कार्य

  1. राजा राम मोहन राय
    • सती प्रथा का विरोध
    • 1829 में सती प्रथा का अंत
  2. ईश्वरचंद्र विद्यासागर
    • विधवा पुनर्विवाह आंदोलन
    • महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा
  3. प्रार्थना समाज और ब्रह्म समाज
    • महिला शिक्षा का समर्थन
    • बाल विवाह का विरोध
    • विधवा पुनर्विवाह का समर्थन

4. महिलाओं द्वारा संचालित संगठन

समय के साथ महिलाओं ने स्वयं भी संगठन बनाकर आंदोलन शुरू किया।

प्रमुख संगठन

  1. स्त्री सोसाइटी (1882)
    • संस्थापक: स्वर्णकुमारी देवी
    • उद्देश्य: महिलाओं को शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता देना
  2. आर्य महिला समाज
    • संस्थापक: पंडिता रमाबाई
  3. भारत स्त्री मंडल (1910)
    • संस्थापक: सरला देवी चौधुरानी
    • उद्देश्य: सभी वर्गों की महिलाओं को संगठित करना

5. स्वतंत्रता पूर्व महिला आंदोलन के मुख्य मुद्दे

(1) शिक्षा में भागीदारी

  • महिला आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य महिला शिक्षा का प्रसार था।
  • प्रमुख योगदान:
    • सावित्रीबाई फुलेभारत की पहली महिला शिक्षिका
    • लड़कियों के लिए स्कूल की स्थापना
  • महिला शिक्षा के माध्यम से जागरूकता बढ़ी।

(2) सामाजिक और राजनीतिक अधिकार

महिलाओं ने कई अधिकारों के लिए संघर्ष किया:

  • वोट देने का अधिकार
  • राजनीतिक प्रतिनिधित्व
  • सामाजिक समानता

1917 में Women’s Indian Association की स्थापना हुई।
इस संगठन ने महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों के लिए आंदोलन किया।


(3) निजी कानूनों में सुधार

महिला संगठनों ने निम्न सुधारों की मांग की:

  • बाल विवाह रोकना
  • पर्दा प्रथा समाप्त करना
  • विधवाओं की स्थिति सुधारना
  • विवाह और संपत्ति से जुड़े कानूनों में बदलाव

1927 में अखिल भारतीय महिला सम्मेलन में इन मुद्दों पर चर्चा हुई।


6. राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी

महिलाओं ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।

प्रमुख आंदोलन

  • स्वदेशी आंदोलन
  • सविनय अवज्ञा आंदोलन
  • भारत छोड़ो आंदोलन

प्रमुख महिला नेता

  • सरोजिनी नायडू
  • अरुणा आसफ अली
  • विजयलक्ष्मी पंडित
  • सुचेता कृपलानी

इन आंदोलनों में महिलाओं ने प्रदर्शन, धरना और जेल यात्रा तक की।


7. श्रम आंदोलन में महिलाओं की भूमिका

  • महिलाओं ने मजदूर आंदोलनों में भी भाग लिया।
  • अनसूया साराभाई ने अहमदाबाद के कपड़ा मिल मजदूर आंदोलन का नेतृत्व किया।
  • इससे महिला नेतृत्व और श्रमिक अधिकारों को बढ़ावा मिला।

8. निष्कर्ष

  • स्वतंत्रता पूर्व महिला आंदोलन ने भारतीय समाज में महिला अधिकारों की नींव रखी।
  • इस आंदोलन ने महिलाओं को
    • शिक्षा
    • सामाजिक सुधार
    • राजनीतिक भागीदारी
      की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग दिया।
  • आगे चलकर यही आंदोलन आधुनिक महिला सशक्तिकरण का आधार बना।

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